जैविक उत्पादन समर्थन

और प्रशिक्षण

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    जैविक उत्पादन समर्थन एवं प्रशिक्षण

    जैविक खेती प्रौद्योगिकी एक वैकल्पिक कृषि प्रनाली है जो मिट्टी की उपज क्षमता में सुधार करने के लिए उचित और किफायती कृषि तकनीकों के उपयोग का वकालत करती है। टिकाउ भूमि उत्पादकता के लिए उपजाऊ भूमि महत्वपूर्ण है। कृषि भूमि मिट्टी मे गिरावट, वनों की कटाई, गलत खेती, चराई प्रथाओं और इंधन की लकड़ी की कमी के कारण कृषि भूमि भारी दवाव में है, इसलिए खाद्य असुरक्षा मे वृद्धि हुई है।

    प्रशिक्षण निम्नलिखित खंड को पूरा करेगा:

    • भाग 1 – प्रशिक्षण की व्यवस्था करना।
    • भाग 2- जैविक खेती के सिद्धांतों को समझना।
    • भाग 3- जैविक उर्वरक।

    प्रशिक्षण की तैयारी।

    प्रशिक्षण की तैयारी।

    प्रशिक्षण प्रक्रिया अध्यन क्षेत्र मे उपलव्ध स्वदशी प्रौद्योगिकियों और प्रश्न मे समस्या पर प्रशिक्षुओं के ग्यान की पहचान के साथ शुरू होती है। प्रशिक्षण के लिए पाठ्यक्रम तैयार करते समय यह जानकारी आवश्यक है। यह ध्यान मे रखना महत्वपूर्ण है कि प्रशिक्षकों को वैकल्पिक तकनीकों के ठोस प्रस्ताव के साथ किसानों के पास जान चाहिए, जो अनको समाधान के रुप मे हो, जिसे किसान बाद में स्थानीय परिस्थितियों मे अपना सके।

    कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य निम्न हैं:

    • . क्षेत्र मे उपजव्ध कृषि संसाधनों के सतत उपयोग और संरक्षण के लिए भूमिक्षरण और रणनीतियों का ग्यान बढाना;
    • . जैविक खेती पौद्योगिकियों पर जागरूकता बढाना;
    • विकल्पों पर समग्र प्रशिक्षण प्रक्रिया के इच्छुक भागीदारों और स्थानीय संस्थानों को सूचित करना;
    • प्रमुख भूमि अवकर्षण की समस्याओं की पहचान;
    • उपलव्ध स्थानीय पौद्यगिकियों की पहचान करना और उनकी व्यवहारिकता पर चर्चा करना;
    • प्रतिभागियों की पहचान, जैसे प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण के लिए कृषि विस्तारक श्रमिकों और किसानों का (TOT)

    जैविक खेती के सिद्धांतों को समझना

    उद्देश्य:

    • जैविक खेती के सिद्धांतों एवं कौशल के ग्यान को हासिल करना।
    • सीखने के तरीकों, समूह चर्चा और क्षेत्र के दौड़े।
    • चर्चा की सामग्री: जैविक खेती की प्रमुख विशेषताएं, जैविक खेती के सिद्धांत, जैविक खेती के लाभ।

    जैविक खेती की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।

    जैविक खेती की विशेषता की समझ अपकर्षित भूमि के प्रवंधन के लिए विशेष रुप से अनेक बार भूमि उपयोग क्षेत्र मे मौलिक है। इसमें से कुछ विशेषताएं हैं:

    • जैविक पदार्थों के स्तर को बनाए रख कर, मिट्टी के जैविक गतिविधि को प्रोतसाहित कर एवं सावधानीपूर्वक यांत्रिक हस्तक्षेप को बनाए रखकर मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता की रक्षा की जा सकती है;
    • फलीदार पौधों और जैविक नाईट्रोजन निर्धारण के उपयोग से नाइट्रोजन आत्मनिर्भरता, साथ ही साथ फसल अधशेषों और पशुधन खाद सहित कार्वनिक पदार्थों का प्रभवी पुनरावृति;
    • खरपतवार, बीमारी और कीट नियंत्रण चक्र मुख्यरूप से, बदलकर फसल लगाने, प्राकृतिक परभक्षी, विविधता, जैविक खाद और प्रतिरोध किस्मों पर निर्भर है।
    • विस्तृत पर्यावरण, वन्यजीव और प्राकृतिक वासों के संरक्षण पर कृषि व्यस्था के प्रभाव का सावधानीपूर्वक ध्यान दिया जाता है।

     

    जैविक खेती की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।

    • मृदा और जल संरक्षण।
    • मिट्टी के पोषक तत्वों का कुशल उपयोग।
    • रिक्त स्थान का कुशल उपयोग।

    जैविक उर्वरक

    उद्देश्य: जैविक उर्वरक को बनाने का पूरा ग्यान प्राप्त करने के लिए – जैविक उर्वरकों को बनाने और उपयोग करने के लिए कौशल विकास करना

    जैविक उर्वरकों के प्रकार:

    • वानस्पतिक खाद ढेर/अम्बार
    • हरी खाद
    • आधी सड़ी घास(छाद)

    परिचय: प्रशिक्षक वानस्पतिक खाद ढेर/अम्वार बनाने की प्रक्रिया को रेखांकित करता है। प्रत्येक कंपोस्टिंग तकनीक का प्रारंभिक प्रदर्शन पूरे समूह के साथ प्रतिभागियों को दिखाने के लिए किया जाता है कि उनसे क्या करने की उम्मीद है। प्रशिक्षक द्वरा निर्देशित प्रतिभागियों, वानस्पतिक खाद बनाने की प्रक्रिया पर चर्चा करते हैं और उसके कमजोर और मजबूत बिंदुओं की पहचान करते हैं। वे अपनी सिफारिशें भी देते हैं।

    परिचय: प्रशिक्षक हरी खाद बनाने की प्रक्रिया और अवधारणा की रुपरेखा तैयार करता है। हरी खाद के प्रशिक्षण का प्रदर्शन पूरे समूह के साथ प्रतिभागियों को दिखाने के लिए किया जायगा कि उनसे क्या करने की उम्मीद है। प्रशिक्षक द्वरा निर्देशित प्रतिभागियों, वानस्पतिक खाद बनाने की प्रक्रिया पर चर्चा करते हैं और उसके कमजोर और मजबूत बिंदुओं की पहचान करते हैं। वे अपनी सिफारिशें भी देते हैं।

    परिचय: प्रशिक्षक छाद की प्रक्रिया और अवधारणाओं को रेखांकित करता है। प्रशिक्षकों द्वारा मार्गदर्शित सहभागी, छाद के बुनियादी अवधरणाओं पर चर्चा करते हैं।